MLA और MLC में क्या अंतर है? भारतीय विधायी व्यवस्था की पूरी जानकारी
- MLA और MLC में मुख्य अंतर क्या है?
- MLC वाला सिस्टम सभी राज्यों में क्यों नहीं है?
- जिन राज्यों में MLC सिस्टम है, वहां इनकी क्या स्थिति है?
- क्या MLC व्यवस्था वास्तव में निरर्थक और अनावश्यक है?

संवैधानिक प्रावधान के बावजूद कुछ राज्यों ने विधानमंडल के दो सदनों वाले पूर्ण स्वरूप को अपनाया हुआ है, लेकिन कई प्रदेशों ने नहीं। वहां आम तौर पर एक ही सदन होता है— विधानसभा।
ऐसे में कुछ सवाल स्वाभाविक हो सकते हैं कि आखिर संवैधानिक प्रावधान होने के बावजूद सभी राज्यों ने विधानपरिषद को क्यों नहीं अपनाया? दूसरा- जिन राज्यों ने इस सदन को अपनाया, वहां इनकी क्या स्थिति है? और तीसरा- ये राज्यसभा से किस तरह अलग हैं? इन सभी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब हम यहाँ जानने की कोशिश करेंगे।
विधान परिषद (Legislative Council) की वर्तमान स्थिति
भारत के संविधान (Constitution of India) में प्रावधान होने के बावजूद देश के सिर्फ 6 राज्यों में ही विधानपरिषदें (Legislative Councils) काम कर रही हैं। ये राज्य हैं:
- आंध्र प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- महाराष्ट्र
- कर्नाटक
- तेलंगाना
इससे पहले असम, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर में भी विधानपरिषदें रह चुकी हैं, लेकिन फिर उन्हें किन्हीं कारणों से भंग कर दिया गया। अब इन सभी राज्यों में सिर्फ विधानसभाएं (Legislative Assemblies) ही कार्य कर रही हैं।
MLA और MLC के बीच मुख्य अंतर
एक MLA (विधानसभा सदस्य) लोगों का सीधे तौर पर चुना हुआ प्रतिनिधि होता है, जो किसी राज्य की विधायिका के निचले सदन (विधानसभा) में काम करता है। वहीं, एक MLC (विधान परिषद सदस्य) अप्रत्यक्ष रूप से चुना गया या मनोनीत सदस्य होता है, जो ऊपरी सदन (विधान परिषद) में काम करता है। मुख्य संरचनात्मक और कार्यात्मक अंतरों में ये शामिल हैं:
- MLA: अपने विशिष्ट भौगोलिक निर्वाचन क्षेत्र के योग्य मतदाताओं द्वारा सीधे तौर पर चुने जाते हैं।
- MLC: निर्वाचक मंडलों (जैसे, स्थानीय निकाय, शिक्षक और स्नातक) द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं, या राज्य के राज्यपाल द्वारा मनोनीत किये जाते हैं।
- MLA: विधानसभा (Vidhan Sabha) में बैठते हैं। विधायिका वाले हर भारतीय राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक विधानसभा होती है।
- MLC: विधान परिषद (Vidhan Parishad) में बैठते हैं। केवल छह राज्यों (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक) में द्विसदनीय विधायिकाएँ हैं जिनमें एक परिषद भी शामिल है।
- MLA: 5 साल के कार्यकाल के लिए काम करते हैं, जब तक कि विधानसभा पहले ही भंग न हो जाए।
- MLC: 6 साल के कार्यकाल के लिए काम करते हैं, जिसमें हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं (जिससे यह एक स्थायी, कभी भंग न होने वाला सदन बन जाता है)।
- MLA: इनके पास महत्वपूर्ण कार्यकारी शक्तियाँ होती हैं, ये फ्लोर टेस्ट/विश्वास प्रस्ताव में मतदान कर सकते हैं और मुख्यमंत्री तथा राष्ट्रपति के चुनाव में भाग ले सकते हैं।
- MLC: सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में या मुख्यमंत्री के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते।
- MLA: चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए।
- MLC: चुनाव लड़ने/मनोनीत होने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए।
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