सोमालिया में समोसे पर प्रतिबंध: अल-शबाब का अजीबो-गरीब फरमान और देश की दुखद कहानी
दुनियाभर में अपने स्वाद के लिए मशहूर समोसा एक समय एक देश में प्रतिबंध का शिकार हो गया था। यह बात सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह एक कड़वी सच्चाई है। 2018 में सोमालिया के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा रखने वाले कट्टरपंथी गुट अल-शबाब ने लाउड स्पीकरों पर घोषणा करके समोसे पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा दिया था। इस खबर को पूरे विश्वभर के मीडिया ने दुनिया के सामने परोसा था और सभी ने इसे बड़े आश्चर्य के साथ पढ़ा था।
सोमालिया का पतन: 'अफ्रीका के स्विट्ज़रलैंड' से भुखमरी तक
सोमालिया आज दुनिया के सबसे नाकाम (Failed States) देशों की सूची में शामिल है। यह जान लेना जरुरी है कि पिछले कई दशकों से सोमालिया बिना किसी स्थिर सरकार के ही चल रहा है। आज वहां जो भी सरकारें बनती हैं, उनका पूरे देश पर शासन या प्रभाव नहीं होता। पश्चिमी देशों के समर्थन से बनी नई सरकार ने अल-शबाब को देश के एक बड़े हिस्से से बेदखल जरूर किया है, लेकिन कुछ हिस्सों में अब भी उनका अधिकार कायम है।
सोमालिया हमेशा से ऐसा नहीं था। इस देश का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है:
- आजादी और स्वर्णिम काल: 60 के दशक में आज़ाद होने के बाद सोमालिया ने प्रजातंत्र को अपनाया था। देश ने इतनी तेज़ी से तरक्की की थी कि कुछ ही सालों में इसे 'अफ्रीका का स्विट्ज़रलैंड' कहा जाने लगा था।
- तानाशाही का दौर: कुछ समय बाद प्रजातंत्र खत्म हो गया और एक फौजी तानाशाह ने देश पर 2 दशकों तक राज किया। इस तानाशाह को अमेरिका और रूस दोनों का ही समर्थन प्राप्त था। तानाशाही के दौर में देश की तरक्की रुक गई।
- कबायली विद्रोह और गृह युद्ध: कबीलों को तानाशाह का शासन पसंद नहीं था। एक धर्म और एक रंग होने के बावजूद देश के नागरिक कबीलों में बंट गए। विद्रोह शुरू हुआ जिसने जल्द ही भयंकर गृह युद्ध का रूप ले लिया।
- विदेशी हस्तक्षेप: तानाशाह के हटने के बाद अलग-अलग कबीले सत्ता के लिए लड़ने लगे। विश्व के बड़े देशों और सोमालिया के पड़ोसी देशों (जिनसे तानाशाह ने दुश्मनी मोल ली थी) ने अपनी फौजें भेजनी शुरू कर दीं, जिससे हालात और बदतर हो गए।
आज के सोमालिया की दर्दनाक स्थिति
विदेशी हस्तक्षेप और आतंरिक लड़ाइयों ने सोमालिया को बर्बादी के दलदल में धकेल दिया। आज सोमालिया की हालत सिर्फ उस देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति के लिए एक दुखद त्रासदी है। वहां भुखमरी, गरीबी, आतंक और असुरक्षा का माहौल है। ऐसे में सोमालिया में अगर समोसा प्रतिबंधित हुआ था, तो यह सिर्फ एक गुट का पागलपन नहीं था, बल्कि इसके पीछे हर उस देश का भी हाथ है जिसने सोमालिया का अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया और उसे बर्बाद कर दिया।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. सोमालिया में समोसे पर प्रतिबंध किसने और कब लगाया था?
सोमालिया में समोसे पर प्रतिबंध साल 2018 में वहां के कट्टरपंथी गुट अल-शबाब द्वारा लगाया गया था, जिनका उस समय देश के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा था।
2. अल-शबाब ने समोसे पर बैन क्यों लगाया?
अल-शबाब का तर्क था कि समोसे का आकार तिकोना होता है, जो ईसाई धर्म के 'होली ट्रिनिटी' सिद्धांत से मेल खाता है। इसी वजह से उन्होंने इसे अपने इलाके में प्रतिबंधित कर दिया था।
3. सोमालिया को कभी 'अफ्रीका का स्विट्ज़रलैंड' क्यों कहा जाता था?
1960 के दशक में आजादी मिलने के बाद सोमालिया ने प्रजातंत्र अपनाया और बहुत तेज़ी से आर्थिक विकास किया। इसकी अभूतपूर्व तरक्की के कारण ही इसे कुछ सालों तक 'अफ्रीका का स्विट्ज़रलैंड' कहा जाता था।