हॉटलाइन क्या है और यह कैसे कार्य करती है?
क्या आपने कभी विचार किया है कि अन्य संचार माध्यमों की तुलना में 'हॉटलाइन' कितनी भिन्न है? इसे 'ऑटोमैटिक सिग्नलिंग', 'ऑफ-हुक सर्विस' या 'रिंगडाउन' के नाम से भी जाना जाता है। मूल रूप से, यह एक ऐसा 'पॉइंट-टू-पॉइंट' कम्युनिकेशन लिंक है जिसके लिए किसी की-पैड या रोटरी डायल की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके लिए इस्तेमाल होने वाले फोन पूरी तरह से डेडिकेटेड होते हैं। जैसे ही उपयोगकर्ता रिसीवर उठाता है, बिना कोई नंबर डायल किए, कॉल पूर्व-निर्धारित (डायरेक्टेड) नंबर पर स्वतः ही कनेक्ट हो जाती है। इसमें कॉलर को किसी भी अतिरिक्त एक्शन की आवश्यकता नहीं होती।
अक्सर आपने इस शब्द को उस संदर्भ में सुना होगा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी गंभीर मसले पर दुनिया भर में मौजूद अपने समकक्षों के साथ चर्चा करते हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच संचार के इस सबसे सुरक्षित माध्यम की अक्सर ख़बरों में चर्चा होती है। इस हॉटलाइन की शुरुआत वर्ष 1971 के युद्ध की समाप्ति के तुरंत बाद की गई थी। यह संचार लाइन भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित सचिवालय को इस्लामाबाद के प्रधानमंत्री कार्यालय में मौजूद सैन्य संचालन महानिदेशालय (DGMO) से सीधे जोड़ती है। दोनों देशों के मिलिट्री लीडर्स (जनरल) द्वारा तनावपूर्ण स्थितियों के दौरान बातचीत के लिए इसका उपयोग किया जाता रहा है।
यह हॉटलाइन कब कब काम मे ली गई:
1991: दोनों देशों के मध्य विश्वास निर्माण के उद्देश्य से हॉटलाइन का पहली बार इस्तेमाल किया गया।
1997: व्यापार से जुड़े मसलों पर जानकारी साझा करने हेतु इसका दूसरी बार प्रयोग हुआ।
1998: पोखरण परमाणु परीक्षण के पश्चात इस लाइन का उपयोग किया गया।
1999: कारगिल संघर्ष के दौरान इस सेवा का इस्तेमाल हुआ।
2001-2002 और 2008: नियंत्रण रेखा (LoC) पर होने वाली निरंतर फायरिंग और आतंकी हमलों के दौरान बातचीत के लिए हॉटलाइन का प्रयोग किया गया।
भारत और अमेरिका के बीच हॉटलाइन की शुरुआत किसने और कब की?
भारत और विश्व के अन्य देशों के बीच कूटनीतिक संबंध हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहे हैं। इसी दिशा में 2015 का वर्ष भारत और अमेरिका के कूटनीतिक रिश्तों के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ। 2015 में जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर आए थे, तब दोनों देशों के नेतृत्व ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया।
यह फैसला था भारत और अमेरिका के बीच सीधे संवाद के लिए एक हॉटलाइन स्थापित करने का।
अमेरिका और रूस: हॉटलाइन की वास्तविकता और भ्रांतियांजहाँ एक ओर भारत और पाकिस्तान ने तीन बड़े संकटों के समय हॉटलाइन का जमकर उपयोग किया, वहीं अमेरिका और रूस का मामला इसके बिलकुल विपरीत था। शीत युद्ध के दौरान, दोनों पक्षों के नेताओं के मध्य परमाणु संकट या अन्य आपातकालीन स्थितियों में संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से अमेरिका और सोवियत संघ के बीच 'डायरेक्ट कम्युनिकेशन लिंक' बनाए गए थे। हालाँकि, अमेरिका और रूस के बीच 'न्यूक्लियर हॉटलाइन' की वास्तविक शुरुआत सोवियत संघ के विघटन के 14 वर्ष बाद ही हो सकी थी। वाशिंगटन और मॉस्को के बीच हॉटलाइन सर्विस का जिक्र अनेक फिल्मों और उपन्यासों में किया गया है। इन उपन्यासों और फिल्मों के कारण आम जनमानस में यह भ्रांति बन गई थी कि अमेरिका और सोवियत संघ के बीच बातचीत के लिए एक 'लाल रंग के टेलीफोन' का उपयोग किया जाता था। वास्तव में, इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है; दोनों देशों के बीच कभी फोन कॉल्स हुई ही नहीं थीं।
किन देशों के बीच मौजूद है हॉटलाइन सर्विस?
वर्तमान में निम्नलिखित देशों के बीच यह हॉटलाइन सेवा स्थापित है:
✓ भारत और अमेरिका
✓ भारत और पाकिस्तान
✓ चीन और भारत
✓ अमेरिका और रूस
✓ अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम (UK)
✓ रूस और चीन
✓ रूस और फ्रांस
✓ रूस और यूनाइटेड किंगडम (UK)
✓ अमेरिका और चीन
✓ चीन और जापान
✓ नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया
भारत - अमेरिका हॉटलाइन के मुख्य बिंदु:
- यह हॉटलाइन आधिकारिक रूप से अगस्त 2015 तक पूरी तरह स्थापित हो गई थी।
- इस ऐतिहासिक कदम का क्रेडिट मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा की व्यक्तिगत दोस्ती और बेहतर आपसी समझ को जाता है।
- यह बात भारत के कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाती है कि भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है जिसकी अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ एक सीधी हॉटलाइन मौजूद है।
- अमेरिका के अलावा, नई दिल्ली और मास्को (रूस) के बीच भी एक महत्वपूर्ण हॉटलाइन है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: भारत और अमेरिका के बीच हॉटलाइन की स्थापना अगस्त 2015 में पूरी हुई थी। इसका निर्णय गणतंत्र दिवस 2015 के दौरान लिया गया था।
उत्तर: कूटनीतिक दृष्टिकोण से यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश है जिसकी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ सीधी हॉटलाइन है।
उत्तर: जी हां, अमेरिका के अलावा नई दिल्ली और मास्को (रूस) के बीच भी एक सीधी हॉटलाइन स्थापित है, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाती है।